Breaking News

मदर टेरेसा का वास्तविक रूप


समाजसेवा, धर्म-परिवर्तन का सबसे अच्छा माध्यम है !
– पोप फ्रांसिस
ईसाइयों के सर्वाच्च धर्मगुरु पोप फ्रांसिन ने हाल ही में धर्म-परिवर्तन संबंधी ट्वीट किया कि धर्म-परिवर्तन का सबसे अच्छा माध्यम समाजसेवा है । इस ट्वीट का दुनिया भर के ईसाइयों ने स्वागत किया है । आश्‍चर्य की बात यह है कि सरसंघचालक मोहन भागवत ने जब कहा था कि मदर टेरेसा की समाजसेवा का वास्तविक उद्देश्य धर्म-परिवर्तन था ! तब उन पर हल्लाबोल करनेवाली राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मीडिया, पोप के वक्तव्य पर मौन रही । पोप के इस वक्तव्य को किसी भी समाचार-पत्र अथवा न्यूज चैनल ने नहीं दिखाया ।



कुछ दिन पहले, सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा था कि मदर टेरेसा सेवा के नाम पर हिन्दुआें का धर्मपरिवर्तन करती थीं। भागवत के इस बयान से ढोंगी धर्मनिरपेक्षतावादी तिलमिला गए । उन्होंने टेरेसा का बचाव करते हुए भागवत की कडी आलोचना आरंभ कर दी है । केवल मतों के लिए ईसाइयों को प्रसन्न रखनेवालों को कदाचित् मदर टेरेसा का वास्तविक रूप ज्ञात न हो। सामान्य जनता को मदर टेरेसा के विषय में जानकारी नहीं है । अतः, सबकी जानकारी के लिए प्रस्तुत है यह लेख!


केवल पैसा इकट्ठा करने के लिए दरिद्रों के लिए सेवाव्रत का ढोंग करनेवाली मदर टेरेसा !


१. मदर टेरेसा के दरिद्रों से संबंधित कार्य का संक्षिप्त परिचय:

विश्‍व की सबसे प्रसिद्ध धनी कैथोलिक संस्थाआें में मदर टेेरेसा की एक संस्था है । मदर टेरेसा की मृत्यु के पश्‍चात उनकी संस्था के नाम पर भारत में ४ करोड १ लाख डालर की (१८० करोड ४५ लाख रुपए मूल्य की) संपत्ति थी तथा न्यूयार्क नगर के ब्रोनॉक्स बैंक में इनकी संस्था के चालू खाते में ५ करोड अमरीकन डॉलर (लगभग २ अरब २५ करोड रुपए) शेष थे । फिर भी, उनके कोलकाता के बालसंगोपन केंद्र में बालकों के लिए न तो खिलौने थे और न खेल का मैदान था । उन बालकों को बार-बार केवल प्रार्थना करने के लिए कहा जाता था ।


२. मदर टेरेसा का चिकित्सालय था, मृत्यु का पहला द्वार:

इंग्लिश शोधकर्ता मेरी लाउडन को, मदर टेरेसा के कोलकाता स्थित चिकित्सालय में, अनेक रोगी भूमि पर लेटे दिखाई दिए । चिकित्सालय के एक साधारण श्रेणी के कक्ष में ५०-६० रोगी ठूंस दिए गए थे । चिकित्सालय में निर्धारित कार्यपद्धति का पालन नहीं किया जाता था । निर्जीवीकरण (स्टरीलाइजेशन) के बिना ही इंजेक्शन की सुइयों का प्रयोग होता था । इससे भी बडी बात यह थी कि प्रयोग के पश्‍चात सुइयों को ठंडे पानी से धोकर पुनः प्रयोग में लाया जाता था । कुछ रोगियों के प्राण, दूसरे चिकित्सालय में भेजकर साधारण-सी शल्यक्रिया कर, बचाए जा सकते थे; परंतु उन्हें वहीं रखकर मरने दिया गया । 
     – एन.एस. राजाराम (अ हिन्दू व्यू ऑफ वर्ल्ड)

३. टेरेसा समाजसेविका अल्प और ईसाई धर्मप्रचारक अधिक:


मदर टेरेसा की एक सहकारिणी ने कहा, वे ज्वरग्रस्त रोगी के माथे पर ठंडे कपडे की पट्टी रखने के बहाने ननों को बप्तिसमा करना सिखाती थीं । – मानोज रखित (क्रिस्चियनिटी इन डिफ्रंट लाइट)


४. टेरेसा को दिव्यपद दिलाने के लिए दरिद्रों को प्रलोभन दिखाकर उनका उपयोग करनेवाले धूर्त ईसाई :

डांग्राम (बंगाल) की मोनिका बेस्रा नामक एक महिला ने मिशनरीज ऑफ चैरिटी पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाते हुए कहा है, मदर टेरेसा के मिशनरियों ने मुझे प्रलोभन देकर फांसा। उन्होंने टेरेसा को दिव्यपद दिलवाने के लिए मेरा उपयोग कर मुझे छोड दिया। बेस्रा ने आगे कहा, मैंने लालच में आकर कहा था कि ‘टेरेसा के केवल स्पर्श से मेरा कर्करोग ठीक हो गया। मिशनरीज ऑफ चैरिटी ने मुझे आर्थिक सहायता का आश्‍वासन देते हुए कहा था, तुम्हारे बेटों की शिक्षा का भार हम उठाएंगे। तुम निश्‍चिंत रहना। ‘टेरेसा ने केवल छूकर मेरा कर्करोग दूर कर दिया, यह कहने के लिए मुझे १९ अक्टूबर २००३ को वैटिकन नगर में, टेरेसा को दिव्यपद देनेवाले पोप जॉन पॉल के सामने खडा कर दिया । मदर टेरेसा को दिव्यपद प्राप्त होने से पहले, मिशनरीज ऑफ चैरिटी की महिलाएं मेरे घर बार-बार आती थीं। उनका काम हो गया। अब वे मेरे पास भूलकर भी नहीं आतीं। मैं अब अत्यंत दरिद्रता से भरा जीवन जी रही हूं।


५. मदर टेरेसा एक कट्टरवादी ईसाई महिला:

भारत में बसे फ्रेंच पत्रकार फ्रान्सुआ गोतिए ने प्रश्‍न किया है कि मदर टेरेसा का निश्‍चित कार्य क्या था ? गोतिए ने अपने लेख में कहा है, अरविंद केजरीवाल, प्रणव रॉय अथवा नवीन चावला जैसे भारतीय मदर टेरेसा का समर्थन क्यों करते हैं, यह समझ के परे है। मदर टेरेसा एक कट्टरवादी ईसाई महिला थी। भारत को ईसाई बनाना ही उसका उद्देश्य था। राहुल प्रियदर्शी ने शंखनाद नामक सूचना-जालस्थल पर लिखे एक लेख में कहा है, मदर टेरेसा ने पूरे विश्‍व में भ्रम फैला रखा है कि भारत दरिद्र, भूखमरी और रोग-व्याधियों से ग्रस्त देश है। ऐसा प्रचार कर उन्होंने विश्‍व भर से करोडों रुपए एकत्र किए और उनका उपयोग चर्च के लिए किया।


६. सब धर्म के निर्धनों की सहायता नहीं करती थीं टेरेसा:

मदर टेरेसा के विषय में शोध करनेवाले डॉ. अरूप चटर्जी ने लिखा हैं, किसी झोपडपट्टी में चलनेवाले टेरेसा के अन्नछत्र का लाभ देनेवाले कूपन केवल निर्धन ईसाइयों को मिलते थे; दूसरे धर्म के निर्धनों को नहीं मिलते थे। इस घटना से सिद्ध होता है कि मदर टेरेसा सब धर्म के निर्धनों की समान रूप से सहायता नहीं करती थीं। 

No comments