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राज्यसभा में वेंकैया का उनके स्टाइल में हुआ स्वागत, विपक्षी नेता ने ‘NAIDU’ की यह बताई ‘फुलफॉर्म’



नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति व राज्यसभा के सभापति एम. वैंकेया नायडू का ऊपरी सदन में शुक्रवार को कई सेकेंडों तक मेज थपथपाकर स्वागत किया गया। विपक्षी सदस्यों ने नायडू को नया कार्यभार ग्रहण करने के लिए शुभकामनाएं दीं। साथ ही उन्हें इस पद पर निष्पक्ष रहने के दस्तूर की याद भी दिलाई। विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने नायडू का स्वागत किया और कहा कि यह कुर्सी न्याय और निष्पक्षता का प्रतीक है। आजाद ने कहा, “आप जिस कुर्सी पर आज बैठ रहे हैं, इसमें न्याय के तराजू का निशान बना हुआ है, जो हमें याद दिलाता है कि यह कुर्सी निष्पक्ष है। न्याय करते समय आप किसी धर्म या पार्टी से जुड़े नहीं होते।”

उन्होंने कहा कि ऊपरी सदन की यह परंपरा रही है कि सदन के व्यवस्थित हुए बगैर कोई विधेयक शोरगुल में पारित नहीं किया जाता और उम्मीद की जाती है कि सदन की परंपरा का सम्मान नए सभापति के तहत भी किया जाएगा।

माकपा के नेता सीताराम येचुरी ने भी कहा कि सभापति के रूप में नायडू दो प्रतीकों– अशोक चक्र व न्याय का तराजू के छाए में बैठ रहे हैं। अशोक चक्र सत्य के विजय की बात कहता है।

येचुरी ने कहा, “श्रीमान, आप संविधान के संरक्षक हैं। लोगों की संप्रभुता सर्वोच्च है। कार्यकारी हमारे (सांसदों) प्रति उत्तरदायी है और हम बदले में जनता के प्रति उत्तरदायी हैं।” तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने भी नायडू को सभापति के तौर पर अपनी शुभकामनाएं दीं।

समाजवादी पार्टी के नेता राम गोपाल यादव ने कहा कि सदन की परंपरा शोरगुल के बीच विधेयक पारित करने की नहीं है, पर यह सिर्फ सभापति का दायित्व नहीं है कि सदन में व्यवस्था बनाए रखें। उन्होंने कहा, “यह हंगामा करने वाले लोगों को भी सोचना होगा कि क्या वह मुद्दा इतना गंभीर है कि उस पर हंगामा हो रहा है।”


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