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गोरखपुर: तीन हफ्ते के बेटे को गंवाने वाले पिता ने बयां किया दर्द

इसी बीच एनआईसीयू के अंदर 14 बच्चों की मौत हो गई। एनआईसीयू 1 में आठ बेड हैं लेकिन वहां पर 24 बच्चे एडमिट थे।



गोरखपुर में बीआरडी अस्पताल की लापरवाही के कारण अब तक कई मां-बाप से उनके बच्चे छिन चुके हैं। बेंगलुरु में रहकर कार्पेंटर का काम करते 24 वर्षीय शैलेंद्र गुप्ता का कहना है कि वे पिछले महीने जुलाई में ही अपने घर लौटे थे। शैलेंद्र की पत्नी ने अपने पहले बच्चे को जन्म दिया था। तीन हफ्ते बाद बच्चे के जन्म का जश्न मनाने के बाद शैलेंद्र और उसकी पत्नी को क्या पता था कि कुछ समय बाद ही उन्हें अपने बच्चे के क्रियाक्रम की तैयारी करनी पड़ जाएंगी। जिले के जैनपुर गांव के रहने वाले शैलेंद्र ने कहा कि मेरे बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी तो हम उसे 9 अगस्त की देर रात बीआरडी मेडिकल कॉलेज लेकर आए।

अस्पताल के स्टाफ ने हमें एक छोटा सा पंप पकड़ा दिया और कहा कि बच्चे को इससे सांस दिलाते रहे। मैंने उस पंप से करीब साढ़े तीन घंटे तक अपने बच्चे को सांस दी। इसके बाद बच्चे को एनआईसीयू लेकर गए। अगले दिन हमें कहा गया कि हमारे बच्चे की मृत्यु हो गई है। रोते हुए शैलेंद्र ने कहा कि मैं उसका चेहरा भी नहीं देख पाया। 10 अगस्त तक बीआरडी अस्पताल में मरने वाले 23 बच्चों में से एक बच्चा शैलेंद्र का भी है। शैलेंद्र ने कहा कि उसे हमेशा ऐसा लगता रहता है कि उसके बच्चे की जान बच सकती थी। इसी प्रकार कई लोगों ने अपनी पीड़ा मीडिया से शेयर की।

देवरिया के रहने वाले मुकेश में कहा कि जोंडिस की शिकायत के बाद उन्होंने अपने बेटे को अस्पताल में भर्ती कराया था। जब मुकेश से 10 अगस्त की तारीख के दिन क्या हुआ इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अचानक यह खबर फैल गई कि अक्सीजन सप्लाई की कमी पड़ रही। कुछ परिजनों को छोटे पंप दे दिए गए और कुछ से कहा गया कि उनके बच्चे अभी आईसीयू में ही हैं। कुछ परिजनों को संदेह था कि उनके बच्चों की मृत्यु हो गई है लेकिन उनके शव उन्हें नहीं सौंपे जा रहे हैं। इसी बीच एनआईसीयू के अंदर 14 बच्चों की मौत हो गई। एनआईसीयू 1 में आठ बेड हैं लेकिन वहां पर 24 बच्चे एडमिट थे।

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