पंजाब में लॉकडाउन के कारण राज्य की आय में 30 प्रतिशत की कमी आने का अनुमान - Bharat Media Digital Newspaper

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Thursday, May 28, 2020

पंजाब में लॉकडाउन के कारण राज्य की आय में 30 प्रतिशत की कमी आने का अनुमान


चंडीगढ़ । साल 2020-21 में राज्य को प्राप्त राजस्व में 30 प्रतिशत की कमी आने के अनुमान के मद्देनजऱ मंत्रीमंडल ने कई सुधारों को सैद्धांतिक मंज़ूरी दे दी है, जिससे पंजाब को कुल राज्य घरेलू उत्पाद (जी.एस.डी.पी.) का 1.5 प्रतिशत अतिरिक्त कजऱ् लेने के योग्य बनाया जा सके, जो कि कोविड के दरमियान भारत सरकार द्वारा निर्धारित किया गया है।
इन सुधारों को अमल में लाने की निगरानी को यकीनी बनाने के लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा और इसलिए प्रशासनिक विभाग केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित तय समय में मुकम्मल करने को यकीनी बनाएंगे क्योंकि अतिरिक्त कजऱ् हद सिफऱ् वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए उपलब्ध है।
मंत्रीमंडल की मीटिंग मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह की अध्यक्षता अधीन हुई। इस दौरान पंजाब वित्तीय जि़म्मेदारी और बजट प्रबंधन एक्ट-2003 में ज़रूरी संशोधन करने की सैद्धांतिक मंज़ूरी भी दे दी है। मंत्रीमंडल ने कानूनी सलाहकार द्वारा मंज़ूर किए गए अंतिम मसौदे पर मोहर लगाने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि भारत सरकार के 7 मई, 2020 के पत्र के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2020-21 में राज्यों द्वारा जी.डी.पी.एस. का 2 प्रतिशत तक अधिक कजऱ् लेने के लिए इजाज़त देने का फ़ैसला किया गया। हालाँकि कजऱ् हद में सिफऱ् 0.5 प्रतिशत तक बिना शर्त ढील दी गई है।‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ प्रणाली, कारोबार को आसान बनाने के साथ-साथ शहरी स्थानीय इकाई / उपभोक्ता और ऊर्जा सैक्टरों में सुधारों को अमल में लाने की शर्त के मुताबिक है।
हरेक सुधार का भाग जी.एस.डी.पी. का 0.25 प्रतिशत होता है और इस तरह कुल एक प्रतिशत होता है। एक प्रतिशत उधार लेने की बाकी सीमा हर एक को 0.50 प्रतिशत की दो किस्तों में जारी की जाएगी-पहली खुले रूप में सभी राज्यों को तुरंत जबकि दूसरा निर्धारित सुधारों में कम- से -कम तीन के लिए जारी की जाएगी।
प्रवक्ता ने बताया कि अलग-अलग प्रशासनिक विभागों द्वारा किए जा रहे सुधारों संबंधी विस्तार में जानकारी देते हुए प्रवक्ता ने बताया कि खाद्य एवं सिविल सप्लाईज़ विभाग राज्य में सभी राशन कार्डों और लाभपात्रियों को आधार के साथ जोड़ कर ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ प्रणाली को अमल में लाने को यकीनी बनाएगा, जो 0.25 प्रतिशत का हिस्सा बनता है। इसके अलावा राज्य में 31 दिसंबर, 2020 तक सभी एफ.पी.एसज़ को स्व-चालित बनाया जाएगा।
औद्योगिक विभाग द्वारा व्यापारिक सुविधा के लिए 0.25 हिस्से के साथ जि़ला स्तरीय और लाइसेंसिंग सुधारों को अमल में लाया जाएगा। इन सुधारों में व्यापारिक गतिविधियों को आसान करने के लिए उद्योग और अंदरूनी व्यापार (डी.पी.आई.आई.टी) के लिए विभाग द्वारा दिखाई जि़ला स्तरीय व्यापारिक सुधार अमल योजना की पहली समीक्षा के अलावा केंद्रीय स्तर पर कंप्यूटर के ज़रिये फुटकल निरीक्षण प्रणाली को लागू करना शामिल है, जो केंद्र सरकार द्वारा 31 जनवरी, 2021 के लिए एक्टों के अंतर्गत सूचीबद्ध किया गया है।
स्थानीय निकाय विभाग द्वारा 0.25 फीसदी हिस्से के साथ-साथ स्थानीय निकाय विभाग के विभिन्न अंगों को मज़बूत बनाने के लिए सुधारों को लागू किया जाएगा, जिसके अंतर्गत चल रहे सर्कल रेटों (प्रापर्टी तबादलों के रेटों के लिए नियम) मुताबिक शहरी स्थानीय निकाय विभागों द्वारा जायदाद टैक्स की फ्लोर कीमतें नोटीफाई करनी और सिवरेज, ड्रेनेज और वॉटर सप्लाई के प्रावधानों के हिसाब से फ्लोर कीमतों का प्रयोग कीमतें तय करना जो मौजूदा दरों / बीती महँगाई दर को दिखाएं। इसके द्वारा ऐसी प्रणाली भी अमल में लाई जाएगी जो कीमतों के वृद्धि के अनुसार जायदाद के फ्लोर रेटों / प्रयोग कीमतों में समय अवधी के अनुसार विस्तार करे। इन सुधारों के लिए 15 जनवरी, 2021 की तिथि को तय की गई है।
बिजली विभाग द्वारा किए जाने वाले सुधारों में 0.05 फीसदी के हिस्से के साथ राज्य के लक्ष्यों के अनुसार सप्लाई की औसतन लागत और औसतन आमदन (ए.सी.एस -ए.आर.आर के अंतर) के बीच के अंतर के अनुसार कुल तकनीकी और व्यापारिक घाटों को घटाना शामिल है। एनर्जी विभाग के पास सिफारशों के पहुँचने के लिए आखिरी तारीख़ जनवरी 31, 2021 रखी गई है। इसकी तरफ से किसानों को मुहैया करवाई जाती मुफ़्त बिजली (0.15 फीसद हिस्से के साथ) के बदले सीधी लाभ तबदीली (डी.बी.टी) के ज़रिये फंड ट्रांसफर करने के लिए वित्तीय वर्ष 2020-22 के लिए स्कीम को लागू किया जाएगा। इस ख़ातिर योग्य बनने के लिए राज्य द्वारा डी.बी.टी को अंतिम रूप देकर 31 दिसम्बर, 2020 तक कम- से -कम एक जि़ले में लागू करना होगा।
प्रवक्ता ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा कोविड के फैलाव को रोकने के लिए पूरी सतर्कता के साथ काम किया गया और इस महामारी के नतीजे के तौर पर राज्य के कुल घरेलू उत्पाद और आमदनी को भी नुकसान हुआ है। वित्त मंत्री द्वारा पंजाब मंत्रीमंडल के समक्ष पेश किए गए मूलभूत अंदाज़ों के मुताबिक राज्य को आमदन पक्ष से 21,563 करोड़ का घाटा पडऩे की संभावना है, जो कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में 88,004 करोड़ की कुल आमदन वसूली का 25 फीसद के करीब है। इसके साथ ही लॉकडाउन में 31 मई तक की गई वृद्धि के साथ 26,400 करोड़ आमदन नीचे आएगी जो कि वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान राज्य की होने वाली अंदाज़न कुल आमदन वसूली (बी.ई) का 30 फीसद बनता है। अंदाज़े के मुताबिक राज्य के कुल घरेलू उत्पाद में विस्तार नहीं होगा और यह 5,74,760 करोड़ (2019-20) के बराबर रहेगा। इसके साथ कुल आमदन वसूली (टी.आर.आर) में करीब 25,578 करोड़ या 29.26 फीसद घाटा होने की उम्मीद है।

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