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Friday, July 24, 2020

राजस्थान के राज्यपाल मिश्र राजभवन में कांग्रेस विधायकों के धरना-प्रदर्शन से नाराज, कानून व्यवस्था पर सवाल उठाया #भारत_मीडिया, #Bharat_Media

जयपुर । राज्यपाल कलराज मिश्र ने राजभवन में कांग्रेसी विधायकों के धरना-प्रदर्शन से नाराज होते हुए सीएम अशोक गहलोत को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र के जरिये राजभवन में सुरक्षा व्यवस्था में कमी को लेकर नाराजगी जाहिर की है। पत्र में उन्होंने लिखा है कि अगर राज्य की पुलिस राजभवन की सुरक्षा नहीं दे सकती है, तो क्या किसी अन्य एजेंसी से उन्हें सुरक्षा लेनी होगी। साथ ही राज्यपाल ने कहा है कि कहा है कि संवैधानिक मर्यादा से ऊपर कोई नहीं होता है । उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की दबाव की राजनीति नहीं होनी चाहिए। राज्य सरकार द्वारा दिनांक 23 जुलाई, 2020 को रात में विधानसभा के सत्र को अत्यन्त ही अल्प नोटिस के साथ आहूत किये जाने की पत्रावली पेश की गई । पत्रावली में गुण दोषों के आधार पर राजभवन द्वारा परीक्षण किया गया तथा विधि विशेषज्ञों द्वारा परामर्श प्राप्त किया गया । तदपुरान्त राज्य सरकार के संसदीय कार्य विभाग को राजभवन द्वारा निम्नलिखित बिन्दुओं के आधार पर स्थिति प्रस्तुत करने के लिए पत्रावली प्रेषित की गई है-
1. विधानसभा सत्र को किस तिथि से आहूत किया जाना हे, इसका उल्लेख केबिनेट नोट में नहीं है और ना ही केबिनेट द्वारा कोई अनुमोदन प्रदान किया गया है।
2. अल्प सूचना पर सत्र बुलाये जाने का न तो कोई औचित्य प्रदान किया गया है और ना ही कोई एजेण्डा प्रस्तावित किया गया है। सामान्य प्रक्रिया में सत्र आहूत किए जाने के लिए 21 दिन का नोटिस दिया जाना आवष्यक होता है।
3. राज्य सरकार को यह भी सुनिश्चित किये जाने के निर्देश दिए गए हैं कि सभी विधायकों की स्वतन्त्रता एवं उनका स्वतंत्र आवागमन भी सुनिश्चित किया जावे।
4. कुछ विधायकों की निर्योग्यता का प्रकरण माननीय उच्च न्यायालय और माननीय सर्वोच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है। उसका संज्ञान भी लिए जाने के निर्देश राज्य सरकार को दिए गए हैं। साथ ही कोरोना के राजस्थान राज्य में वर्तमान परिपेक्ष्य में तेजी से फैलाव को देखते हुए किस प्रकार से सत्र आहूत किया जायेगा, इसका भी विवरण प्रस्तुत किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
5. राजभवन द्वारा स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि प्रत्येक कार्य के लिए संवैधानिक मर्यादा और सुसंगत नियमावलियों में विहित प्रावधानों के अनुसार ही कार्यवाही की जावे।
6. यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार का बहुमत है तो विश्वास मत प्राप्त करने हेतु सत्र आहूत करने का क्या औचित्य है।


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