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Saturday, July 11, 2020

राजस्थान के विधायकों की तुलना बकरामंडी और बकरों से करना अपमानजक - डॉ. सतीश पूनिया #भारत_मीडिया, #Bharat_Media

Comparing Rajasthan MLAs with Bakramandi and goats is disgraceful - Jaipur News in Hindi
जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनिया, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचन्द कटारिया एवं उपनेता प्रतिपक्ष नेता राजेन्द्र राठौड़ ने प्रेस काँफ्रेंस को सम्बोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की प्रेस काँफ्रेंस में उनके व्यवहार में हताशा, निराशा और बौखलाहट स्पष्ट तौर पर दिखी, जिसे पूरे प्रदेश की जनता ने देखा।

डाॅ. सतीश पूनिया ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बौखलाहट और हताशा से यह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस के अन्दर जो अन्तर्कलह और अन्तर्विरोध है उसका ठीकरा वो भाजपा पर फोड़ रहे हैं। डाॅ. पूनिया ने कहा कि 1993-1998 में स्वर्गीय भैरोंसिंह शेखावत जी की लोकप्रिय सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की गई, उस समय भजनलाल अटैची लेकर आये थे। डाॅ. पूनिया ने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रेस काँफ्रेंस में गद्दार शब्द का जिक्र किया है, वे खुलासा करें कि कौन गद्दार हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की विफलता और कोरोना प्रबंधन में विफलता को छुपाने और ध्यान बंटाने के लिए मुख्यमंत्री गहलोत एसओजी, एसीबी इत्यादि एजेंसियों के माध्यम से निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों को ड़राने-धमकाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस और एजेंसियों को अपराध की रोकथाम में लगाना चाहिए, लेकिन मुख्यमंत्री गहलोत ने इन एजेंसियों को फोन टैपिंग और जासूसी करने में लगा रखा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कभी विधायकों की कीमत 35 करोड़ लगाते हैं तो कभी 20-25 करोड़ लगाते हैं, वे राहुल गाँधी से मार्गदर्शन ले लिया करें कि उनको क्या बयान देना है।



डाॅ. पूनियां ने कहा कि राजस्थान में अराजकता, भ्रष्टाचार, अपराध पर बोलने से मुख्यमंत्री बचते हैं। इन मुद्दों की तरफ इनका कोई ध्यान नहीं है। प्रदेश की जनता तीन महीने के बिजली-पानी के बिल माफ करने की मांग कर रही है। साथ ही स्कूलों की फीस को लेकर भी समाधान निकालने की मांग की जा रही है, लेकिन मुख्यमंत्री गहलोत जनहित के मुद्दों का समाधान करने के बजाय सरकार के अन्दर चल रहे अन्तर्कलह, अन्तर्विरोध और सरकार की पौने दो साल की विफलता को छुपाने के लिए भाजपा पर झूठा आरोप लगाकर जनता का ध्यान भटकाने में लगे हुए हंै।

नेता प्रतिपक्ष गुलाबचन्द कटारिया ने कहा कि निर्दलीय विधायक ने हमारे प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का पत्र दिया, जिसमें उन्होंने 23 विधायकों की बात कही है, लेकिन प्रदेशाध्यक्ष ने अपने बयान में किसी भी विधायक का नाम नहीं लिया है और ऐसे में विशेषाधिकार हनन का कोई मामला बनता ही नहीं है ।

कटारिया ने कहा कि प्रेस काँफ्रेंस में मुख्यमंत्री हताश दिखे और उनकी कही गई बातों को पूरे प्रदेश की जनता ने देखा कि मुख्यमंत्री नीचता पर उतर आये हैं ।

कटारिया ने कहा कि मुख्यमंत्री एसओजी और एसीबी की कार्यवाही करवायें, हमें किसी बात का डर नहीं है। कांग्रेस में अन्दरखाने जो अन्तर्कलह चल रही है उसे मुख्यमंत्री सम्भाल नहीं पा रहे हैं। ऐसे में वे भाजपा पर झूठे आरोप लगा रहे हैं। मुख्यमंत्री गहलोत को मैं चुनौती देता हूँ कि जो उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाये हैं, उन्हें वे साबित करके बतायें। अगर आरोप साबित होते हैं तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा और अगर आरोप साबित नहीं होते हैं तो मुख्यमंत्री गहलोत राजनीति छोड़ें।

उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हल्के शब्दों का प्रयोग किया है, बहुत ही नीचता की है। बकरामण्डी जैसे शब्दों का प्रयोग कर उन्होंने प्रदेश के सभी विधायकों का अपमान किया है। मुख्यमंत्री ने विधायकों की तुलना बकरामण्डी और बकरों से की हैं, जिसकी मैं कड़ी निन्दा करता हूँ और इससे यह साफ जाहिर हो गया है कि मुख्यमंत्री गहलोत अपना मानसिक सन्तुलन खो बैठे हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री गहलोत ने आज तक एक भी आन्दोलन का नेतृत्व नहीं किया और ना ही किसी आन्दालेन में शामिल हुए। लेकिन वे कांग्रेस के दिल्ली दरबार में हाजिरी लगाकर सत्ता के शीर्ष पद पर बने रहते हैं और प्रदेश में उनकी पार्टी का कोई नेता उनका विरोध करता है तो उसको हाशिये पर रखते हैं।



उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री गहलोत ने निर्दलीयों और अन्य दलों के विधायकों को डराने-धमकाने के लिए एसओजी और एसीबी के जरिए यह पटकथा लिखी है, जिससे विधायकों के विद्रोह को रोका जा सके।



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