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Saturday, July 25, 2020

Kanpur Kidnapping: नौसिखिए अपहरणकर्ताओं ने कदम-कदम पर दी पुलिस को मात, सर्विलांस फेल, मुखबिर तंत्र ध्वस्त

kanpur kidnapping case
संजीत का अपहरण करने वालों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। पैसों के लालच में नौसिखिए अपहरणकर्ताओं ने साजिश रची और वारदात को अंजाम दे डाला। पर, इन नौसिखिए बदमाशों ने पुलिस को कदम-कदम पर मात दी। पुलिस की लापरवाही का फायदा इन्होंने खूब उठाया। हैरानी की बात ये भी है कि लॉकडाउन के दिन यानी 27 जून को बदमाशों ने कार से ले जाकर शव को नदी में फेंका लेकिन पुलिस ने उनको कहीं पर भी न रोका, न टोका। पुलिस की नाकामी ही संजीत की हत्या की वजह बनी।
26 कॉल कीं, फिर भी ट्रेस नहीं कर सकी  
अपहरणकर्ताओं ने 29 जून को पहली फिरौती कॉल की थी। इसके बाद 13 जुलाई तक 26 बार एक ही नंबर से कॉल कीं, कई-कई मिनट तक बातचीत हुई। पुलिस को इसकी पूरी जानकारी थी। मगर सर्विलांस अपहरणकर्ताओं को ट्रेस ही नहीं कर सका। साफ है कि पुलिस ने या तो ट्रेस करने की जहमत नहीं उठाई या फिर सर्विलांस पर ही उसका नंबर नहीं लगाया। पुलिस की सबसे बड़ी नाकामी यही रही।
बदमाशों की घेराबंदी में नाकाम
योजना के मुताबिक 13 जुलाई की शाम को अपहरणकर्ता परिजनों से फिरौती के पैसे लेने पहुंचे थे। एसपी साउथ अपर्णा गुप्ता, इंस्पेक्टर रणजीत राय समेत अन्य फोर्स भी परिजनों के साथ मौजूद था। मगर पुलिस ने चारों तरफ से घेराबंदी नहीं की थी। पुलिस वाले हाईवे पर ऊपर खड़े होकर लाचार बने रहे और नीचे बदमाश रुपयों से भरा बैग लेकर चले गए। घेराबंदी न कर पाने में पुलिस नाकाम रही।

संजीत के दोस्तों तक से नहीं की पूछताछ
अपहरणकर्ता संजीत के बेहद करीबी निकले हैं जो पहले उसके साथ काम कर चुके थे। अपहरण वाले दिन भी उनसे संजीत से कई बार बातचीत हुई थी। इसके बावजूद पुलिस संजीत के इन दोस्तों तक नहीं पहुंच सकी। इनमें से कोई फरार भी नहीं हुआ था। फिर भी पुलिस नेउनसे पूछताछ तक नहीं की।

सीसीटीवी भी नहीं जुटा पाई पुलिस
घर से पांच सौ मीटर की दूरी से ही संजीत को आरोपी कार में बैठाकर ले गए थे। पुलिस ने दूसरे दिन गुुमशुदगी तो दर्ज कर ली थी लेकिन तफ्तीश करने की जहमत नही उठाई। यही वजह है कि संजीत के घर से निकलने के बाद के कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं जुटा सकी। अगर फुटेज जुटाती तो कहीं न कहीं संजीत और आरोपियों की कार नजर आती। वारदात में ये भी पुलिस की बड़ी नाकामी रही है।

लॉकडाउन में शव ठिकाने लगाते भी नहीं पकड़ सके
शासन के आदेशानुसार वीकेंड यानी शनिवार और रविवार को लॉकडाउन घोषित है। 27 जून को शनिवार था। यानी शहर में लॉकडाउन लागू था। इसी दिन सुबह अपहरणकर्ताओं ने शव को कार से ले जाकर ठिकाने लगाया। मगर कहीं भी पुलिस ने उनको नहीं रोका। लॉकडाउन में पुलिस की असक्रियता भी नाकामी की वजह रही।

मुखबिर तंत्र भी रहा फेल  
पुलिस को जितनी मदद सर्विलांस से मिलती है, कभी-कभी उससे ज्यादा मदद मुखबिरों से मिलती है। इस केस में अपहरण करने वाले संजीत के घर से कुछ दूरी पर ही डेरा डाले रहे। संजीत को मार दिया और शव ठिकाने लगा दिया। फिर भी पुलिस को कानोकान खबर नहीं लगी। मुखबिर तंत्र पूरी तरह फेल रहा।

खुद पीड़ित को कठघरे में खड़ा करते रहे  
बर्रा थानेदार रणजीत राय हों या एसपी साउथ अपर्णा गुप्ता, वारदात के बाद कई बार पीड़ित परिवार को ही कटघरे में खड़ा करते रहे। उनसे ही ऐसे सवाल पूछे, मानो संजीत को गायब करने में उनकी ही भूमिका रही हो। लगातार यही कह रहे थे कि कर्ज से परेशान होकर संजीत कहीं भाग गया या फिर कोई लड़की का चक्कर है। पुलिस ने ये सब करने में खूब समय जाया किया।


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