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Wednesday, August 26, 2020

क्या बंगाल में ममता सरकार को पटखनी दे पाएगी BJP? PM मोदी के चेहरे पर ही लड़ेगी चुनाव

पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। ऐसे में सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस से जीत छीनने के प्रयास में लगी बीजेपी प्रधानमंत्री के विकास के एजेंडे पर ही चुनाव लड़ेगी। इस पूरे मामले से अवगत लोगों ने यह जानकारी हमारे सहयोगी अखबार 'हिन्दुस्तान टाइम्स' को दी। भले ही बीजेपी ने राज्य में चुनाव के लिए ममता बनर्जी सरकार को घेरते हुए ठोस कैंपेन की शुरुआत की है, लेकिन पार्टी ने प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे पर ही आगे बढ़ने का विकल्प चुना है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है, जब बीजेपी बिना मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के नाम के चुनाव लड़ने जा रही है। पहले भी कई राज्यों में बीजेपी बिना मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किए हुए चुनाव लड़ चुकी है।

बंगाल में पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, 'मुख्यमंत्री उम्मीदवार के नाम का सुझाव देना अभी बहुत जल्दबाजी होगी। यह फैसला दिल्ली में नेतृत्व के ऊपर छोड़ दिया गया है।' उन्होंने कहा, 'अभी ध्यान टीएमसी के कुशासन और शासन की विफलता पर केंद्रित है। पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि बीजेपी सरकार बनने पर होने वाले लाभों के बारे में राज्यभर में जागरूकता पैदा करें। स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह से बदलने वाली आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं को बंगाल में अनुमति नहीं दी गई है। पूरे राज्य में व्यापक स्तर पर हिंसा और विकास में कमी है।' बीजेपी जहां एक ओर प्रधानमंत्री मोदी की जनता के बीच लोकप्रियता के जरिए चुनाव में अपनी उम्मीदें लगाए बैठी है, वहीं, दूसरी ओर पार्टी में सामंजस्य को लेकर भी कुछ चिंताएं हं। राज्य के नेताओं के बीच मतभेद सामने आ चुके हैं, जिसके बाद राष्ट्रीय नेतृत्व को एक से अधिक बार हस्तक्षेप करना पड़ा है। 


हाल ही में बीजेपी के राज्य प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था कि राज्य इकाई मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी। इस बयान को मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय के लिए बड़ा झटका माना जा रहा था, जिन्होंने पार्टी में फिर से शामिल होने की इच्छा जाहिर की थी। वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, 'मुख्यमंत्री पद के कई दावेदार हैं और पार्टी इकाई के प्रमुख दिलीप घोष और टीम के कुछ सदस्यों के बीच मतभेद हैं। केंद्रीय नेतृत्व को मतभेदों को दूर करने के लिए कदम उठाना पड़ा है।' तथागत रॉय जोकि त्रिपुरा के भी राज्यपाल और बंगाल में बीजेपी के अध्यक्ष रह चुके हैं, वे पार्टी में दोबारा शामिल होने को लेकर काफी मुखर रहे।

उन्होंने कहा कि वे पश्चिम बंगाल में पार्टी के लिए काम करने को उत्सुक हैं, लेकिन अपनी भूमिका तय करने का फैसला पार्टी पर ही छोड़ते हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे यह नहीं तय करना है कि पार्टी में मेरी भूमिका क्या रहेगी क्योंकि मैं पार्टी में दोबारा शामिल होऊंगा। यह पार्टी के नेतृत्व, राष्ट्रपति आदि पर निर्भर रहेगा। मुझे पार्टी जो भी जिम्मेदारी देती है, उसे पूरी तरह से निभाने के लिए मैं तैयार हूं। मैं अगले महीने 75 साल का जाऊंगा और ऐसे में अगर पार्टी को लगता है कि मैं फिट हूं तो आगे देखा जाएगा। इस बीच, मेरे अंदर विभिन्न क्षमताओं में पार्टी में काम करने की पर्याप्त गुंजाइश है।'





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