Krishna Janmashtami Vrat 2020 : आज मथुरा में जन्मेंगे नंदलाल, जानें कितने बजे बजेगी बधाइयां... - Bharat Media Digital Newspaper

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Wednesday, August 12, 2020

Krishna Janmashtami Vrat 2020 : आज मथुरा में जन्मेंगे नंदलाल, जानें कितने बजे बजेगी बधाइयां...

Janmashtami 2020 Images: 11 अगस्त को जन्माष्टमी का व्रत रखें या कृष्ण भक्त 12 अगस्त को जन्माष्टमी व्रत विधि के अनुरूप करें.
  श्री कृष्ण जन्माष्टमी किस दिन है? जन्माष्टमी का व्रत किस दिन रखें? ऐसे कुछ सवाल हर साल की तरह इस बार भी लगातार कृष्ण भक्त पूछ रहे हैं. . 11 अगस्त को जन्माष्टमी का व्रत रखें या कृष्ण भक्त 12 अगस्त को जन्माष्टमी व्रत विधि के अनुरूप करें. एक और बात सामने आ रही है कि चूंकि भगवान कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था इसलिए अगर इस समय को मान्यता दी जाए तो ये 13 अगस्त को पड़ रहा है. हालांकि कोरोना वायरस की महामारी के कारण देशभर के मंदिरों में सिर्फ पूजा होगी लेकिन भक्तों का जमावड़ा नहीं लगेगा. आइए इस ब्लॉग के माध्यम से जानते हैं कि जन्माष्टमी व्रत कैसे रखें, किन नियमों का पालन करें और क्या पूजन सामग्री की आवश्यकता होती है...


मथुरा के लगभग सभी मंदिरों ने जन्‍मलीला का लाइव टेलीकास्‍ट कराने की तैयारी है. कृष्‍ण जन्‍मस्‍थली का लाइव दूरदर्शन पर होगा. वहीं अन्‍य प्रमुख मंदिरों से फेसबुक और यूट्यूब लाइव कराने की व्‍यवस्‍था की गई है. बांकेबिहारी की नगरी में हर मंदिर में अपने तरीके से आराध्य श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा. चूंकि भगवान के जन्म का समय रात 12 बजे माना गया है, इसलिए अधिकतर मंदिरों में रात 12 बजे ही ठाकुरजी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा.

12 बजे रात से पहले स्नना करें. इसके बाद सूर्य, सोम, यम, काल, संधि, भूत, पवन, दिक्‌पति, भूमि, आकाश, खेचर, अमर और ब्रह्मादि को नमस्कार कर पूर्व या उत्तर मुख बैठें. फिर काले तिलों के जल से स्नान कर देवकीजी के लिए 'सूतिकागृह' नियत करें. इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. मूर्ति में बालक श्रीकृष्ण को स्तनपान कराती हुई देवकी हों और लक्ष्मीजी उनके चरण स्पर्श किए हों अगर ऐसा चित्र मिल जाए तो बेहतर रहता है. इसके बाद विधि-विधान से पूजन करें. पूजन में देवकी, वसुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा और लक्ष्मी इन सबका नाम क्रमशः लेना चाहिए. फिर निम्न मंत्र से पुष्पांजलि अर्पण करें- 'प्रणमे देव जननी त्वया जातस्तु वामनः। वसुदेवात तथा कृष्णो नमस्तुभ्यं नमो नमः। सुपुत्रार्घ्यं प्रदत्तं में गृहाणेमं नमोऽस्तुते।' अंत में प्रसाद वितरण कर भजन-कीर्तन करते हुए रतजगा करें.



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