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Tuesday, October 27, 2020

दिल्ली सरकार से मिलने नहीं पहुंचे दिल्ली के तीनों मेयर #BharatMedia.in



नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के मुताबिक, डॉक्टरों के वेतन के मुद्दे पर एमसीडी की सत्ता में बैठी भाजपा सिर्फ राजनीति कर रही है। दिल्ली नगर निगम के अधीन अस्पतालों के डॉक्टर्स और अन्य कर्मचारी वेतन मिलने में हो रही देरी को लेकर धरने पर बैठे हैं। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने सोमवार को कहा, "मैंने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आदेशानुसार वेतन मुद्दे पर बातचीत के लिए दिल्ली एमसीडी के तीनों मेयर को दोपहर 2 बजे मिलने का समय दिया था, लेकिन पूरा दिन गुजर जाने के बाद भी कोई मिलने नहीं आया। एमसीडी अगर डॉक्टर के मुद्दे को लेकर गंभीर होती, तो वो बैठकर बात करती, लेकिन इनका मकसद सिर्फ राजनीति करने का है और इस बात की कोई परवाह नहीं है कि डॉक्टर्स को उनका वेतन मिल रहा है या नहीं।"

उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ सप्ताह से दिल्ली एमसीडी के अधीन अस्पतालों के डॉक्टर्स और अन्य कर्मचारी अपने वेतन मिलने में हो रही देरी को लेकर धरने पर बैठे हैं। वहीं सोमवार को एमसीडी के मेयर दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल के आवास के सामने धरने पर बैठ गए और दिल्ली सरकार से पैसे कि मांग करने लगे।

स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने कहा, "केंद्र सरकार सारे म्युनिसिपल कारपोरेशन को उसके अधिकार क्षेत्र में रहने वाले प्रति व्यक्ति के हिसाब से पैसा देती है, लेकिन वो दिल्ली के म्युनिसिपल कारपोरेशन को कोई पैसा नहीं दे रही है। दिल्ली के मेयर को चाहिए कि वो केंद्र सरकार से माँग करें कि दिल्ली एमसीडी को भी केंद्र सरकार द्वारा उनके हक के अनुदान के बकाया पैसे दिए जाए।"

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि दिल्ली के एमसीडी पर दिल्ली सरकार का हजारों करोड़ बकाया है, जो एमसीडी को चुकता करना है। दिल्ली एमसीडी केंद्र सरकार से पैसे नहीं मांगती है, जबकि केंद्र और एमसीडी दोनों में भाजपा की ही सरकार है।

सतेंद्र जैन ने कहा, "एमसीडी ने पूरी दिल्ली में होर्डिग्स और पोस्टर्स लगाए हुए हैं और इन सब पर मोटा पैसे खर्च करती है। एमसीडी के अन्दर बहुत ज्यादा भ्रष्टाचार है, इनके पास जितना भी पैसा हो, सारा भ्रष्टाचार में खत्म हो जाता है।"

उन्होंने कहा कि एमसीडी अपने सिस्टम को सही से नहीं चला पा रही है। हाउस टैक्स का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अगर 2500 करोड़ इकठ्ठा करना होता है, तो उसमें से सिर्फ 1000 करोड़ इकठ्ठा करते हैं और बाकी के 1500 करोड़ आपस में बांट लेते हैं। एमसीडी अपना काम सही से नहीं करती है और दिल्ली सरकार से पैसा मांगती है। दिल्ली सरकार को जो भी पैसा देना था, वो पहले ही दिया जा चुका है।

सतेंद्र जैन ने कहा, "इन सारे मुद्दों का हल यही है कि एमसीडी अपना सिस्टम ठीक कर के वहां से भ्रष्टाचार खत्म करे और अगर ऐसा करने में असमर्थ हैं, तो फिर दिल्ली सरकार के हवाले कर दे। हम सिस्टम ठीक कर के सारे अस्पताल अच्छे से चला भी लेंगे और डॉक्टरों को उनका वेतन भी समय पर देंगे।" (आईएएनएस)




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